शुक्रवार, 18 अप्रैल 2025

मैं ही शंकर हूँ

कहाँ ढूंढता है तू मुझें 

मैं तेरे ही अंदर हूँ ।


मैं कोई छोटी झील नही

एक गहरा समुन्दर हूँ ।


खोज मत मुझे

मैं ही ब्रह्मा,

मैं ही विष्णु,

और मैं ही शंकर हूँ।

मंगलवार, 10 जुलाई 2018

मेरी बेटी

खुशियो का त्यौहार लेकर
ढेर सारा प्यार लेकर
मेरी जिंदगी मे उपहार बनकर
मेरी बेटी आयी है ..

सोने की चादर मे लिपटी
चाँदी की गाड़ी मे होकर सवार
मेरी राजकुमारी आयी है
मेरी बेटी आयी है ..

वो प्यार ही प्यार लायी है
खुशियाँ ही खुशियाँ मेरे द्वार लायी है
वो जीवन का अनमोल तोहफा है मेरा
सपनो का अम्बार लायी है
मेरी बेटी आयी है ..

गुरुवार, 29 नवंबर 2012

मुझमे अब भी बाकी है

तेरी आहटे सुन लगता है की ये साँस बाकी है, तेरे मिलने की आँस बाकी है
बिन तेरे सारा जग लगता है सूना, मेरे तन्हाई की साथी तो बस साकी है
मेरे पास तू नहीं मगर , ये जानता हूँ तू मुझमे अब भी बाकी है ।


सोमवार, 26 नवंबर 2012

चितचोर नज़र आता है

तू लाख खफा ही सही, प्यार मगर आता है
तुझमे ये संसार नज़र आता है


तेरे रूप मे प्रकृति का रंग उभर आता है
खुद ख़ुदा भी सोच मे नज़र आता है



आँखों मे कशीश, चेहरा नम्र अहसास लाता है
छू लेता है दिल को जो एक दरस मे, चितचोर नज़र आता है

गुरुवार, 9 सितंबर 2010

मय



" मय को पियो इतना
       के मन बहल जाए
             मय को पियो इतना
                  के ग़म मे डूबा  संभल जाए
                        ना करो यारी इससे इतनी
                              के जिंदगी बिख़र जाए "
                

सोमवार, 23 अगस्त 2010

राखी पर आना तुम भैया

बचपन की यादें कुछ ऐसी है भैया,
कभी नहीं जाती मेरे मन मस्तिष्क से भैया
मेरे प्यारे राज दुलारे भैया
राखी पर आना तुम भैया

साथ-साथ पले बढ़े, खेले साथ हम भैया
शरारतो मे उस्तादों के उस्ताद थे तुम भैया
बचपना न भुला पाउ मे वो कभी अपना भैया     
राखी पर आना तुम भैया

याद है तुम्हे मिट्टी के टीले बनाना आँगन मे
और वो दादी से सुनना कहानी रोज भैया ??
याद है बारिश मे कागज की नाव दौड़ाना
और वो डाट खाने पर एक दुसरे को चिढाना भैया
राखी पर आना तुम भैया  


   

रविवार, 15 अगस्त 2010

वृक्ष

वृक्ष ठंडी गर्मी और बरसात ,
हर मौसम में हमारे साथ |
      रखता है वह हर पल  हर क्षण हमारा ध्यान
      हरा भरा वह वृक्ष , रहता सदा हमारी आँखों के समक्ष |
वह है एकाग्रता की मूरत
वह है ईश्वर की एक सूरत |
      आने वाली दुष्ट हवाएं , उसके निर्मल पत्तो से
      उसकी शाखाओ के जत्थों से , हो जाती निर्मल निःस्वार्थी |
छोटे-छोटे तृण भी करते आदर इसका
करता किरणों से स्वागत सूरज इसका |
      वृक्ष है ये न्यारा,
      ये वक़्त है अर्पण इसको सारा  |
इसकी हर एक श्वास से श्वासे भरता हूँ ,
इसलिए इसके चरणों का मे वंदन करता हूँ|