शुक्रवार, 18 अप्रैल 2025

मैं ही शंकर हूँ

कहाँ ढूंढता है तू मुझें 

मैं तेरे ही अंदर हूँ ।


मैं कोई छोटी झील नही

एक गहरा समुन्दर हूँ ।


खोज मत मुझे

मैं ही ब्रह्मा,

मैं ही विष्णु,

और मैं ही शंकर हूँ।

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